Kamakhya_Guwahati“योनि मात्र शरीराय कुंजवासिनि कामदा। रजोस्वला महातेजा कामाक्षी ध्येताम सदा।।”

कामाख्या मंदिर अपने भीतर कई रहस्य और मायावी संसार को समेटे हुए है। भारत के प्राचीन मंदिरों में शुमार देवी सती का यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है। पुराणों के अनुसार जहां-जहां देवी सती के अंग, धारण किए हुए वस्त्र या आभूषण गिरे, वे देवी के शक्तिपीठ कहलाए। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर देवी सती का पवित्र कौमार्य योनि अंग गिरा था। कामाख्या में मां की कोई मूर्ति नहीं है। इस मंदिर में शक्ति की पूजा महामुद्रा (योनि-कुण्ड) के रूप में होती है। योनि के आकार का एक शिला खण्ड है, जिसके ऊपर लाल रंग के घोल और रक्तवर्ण के वस्त्रों से ढका रहता है।

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