छठ पर्व सूर्य की आराधना और लोक आस्था का पर्व है।हिंदू धर्म में सूर्य पूजा का अपना एक विशेष स्थान रहा है।दीपावली के छह दिन के बाद कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को छठ मनाया जाता है। इसलिए इसे छठ पर्व के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि छठ पर्व को मनाने से पारिवारिक सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। छठ पर्व  सभी पर्वों के मुकाबले सबसे कठिन पर्व माना जाता है। इसमें चार दिनों के निर्जला व्रत के बाद अगले दो दिनों तक पवित्रता और स्वच्छता के साथ सुबह और सांध्य सूर्य की उपासना की जाती है।

सृष्टि और पालनकर्ता शक्ति के कारण सूर्य की उपासना का महत्वहिन्दू सभ्यता के विकास में हमेशा रहा है। छठ पूजा में सूर्य के साथ-साथ उनकी दो शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्युषा) दोनों को अर्ध्यदिया जाता है।

वास्तु शास्त्र में सूर्य को सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक माना गया है। महावास्तु के मुताबिक, सूर्य रिश्तों को बेहतर बनाता है और इंसान की शख्सियत को बहुत ऊँचाई तक ले जाता है। खासकर यह राजनेताओं या प्रभावशाली लोगों को बनाने के पीछे अहम भूमिका निभाता है। अगर आप समाज में प्रभावशाली भूमिका पाना चाहते हैं तो घर के उत्तर दिशा में पीतल (ब्रास) से बना महावास्तु सूर्य रेमिडीलगाएं। यह समाज से लेकर सत्ता तक आपके कनेक्शन के दरवाजे खोलता है। वहीं घर के पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में सूर्य रेमिडी लगाने से यह पारिवारिक जीवन में खुशियां लाता है।लेकिन, घर के पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में टॉयलेट, स्टोर रूम बना हुआ है या लाल, पीला रंग है तो उसे तुरंत वहां से हटाएं। इस दिशा में लिविंग रूम अच्छा माना जाता है।

इस बार छठ पर्व पर सूर्य देवता को अर्ध्य देने के साथ ही आसान महावास्तु रेमिडीज का उपयोग कर अपने घर में खुशियों का खजाना दें।