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Alchemist Krishna on Panchtattva theory of Karma and Phal

कर्म क्या है? कर्म ही पाप और पुण्य का फल देता है। कर्म ही हमें बांधता है स्वर्ग की लालसा में और कर्म ही हमें  नरक में जाने का डर पैदा करता है। मानसिक द्वंद्व के इस दलदल में लोग फंसे हुए हैं। जैसे रण क्षेत्र में अर्जुन खुद को फंसा हुआ पाता है।

कृष्ण की दृष्टि में कर्म पंचतत्वों का संतुलन है, जो एक तत्व से दूसरे तत्वों में रूपांतरित होता है। एक अलकेमिस्ट ही पांचों तत्त्वों के संतुलन के बारे में बता सकता है, जैसा उन्होंने गीता में कहा है -

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Oct

26

2015

ध्यान

Posted By MahaVastu

ध्यान, एक यात्रा है।कोलाहल से शांति की यात्रा। जहां मौन के सिवा और कुछ भी नहीं

लोगों को अकसर सवाल करते हैं। पूछते हैं- ध्यान क्या है, इसे कैसे किया जाए। लेकिन, ध्यान की ऐसी कोई भी अवस्था नहीं है जिनसे आप चौबीस घंटे में कभी गुजरते ना हों। किसी से बात करते हुए, चलते हुए, बैठते हुए, लेटे हुए कभी भी ध्यान किया जा सकता है।

संगीत सुनते हुए कभी – कभी आप खो जाते हैं। कुछ पल के लिए आपको यह आभास ही नहीं होता कि आप संगीत सुन रहे हैं। सुन रहे हैं तो क्या सुन रहे हैं। बस एक ध्वनि है जो कानों में घुल रही होती है लेकिन आप कहीं और जा रहे होते हैं। यही ध्यान है।

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